ॐ Bhupesh Sir
ॐ Bhupesh Upadhyay
20/09/2026
17/09/2026
28/01/2026
ल्यप् - प्रत्ययः
ल्यप् (य) प्रत्ययः
1. उपसर्ग + धातु + ल्यप् (य) प्रत्यय:
अर्थ - कर/करके ।
(Note - क्त्वा और ल्यप् प्रत्यय का अर्थ/Meanings Same है।)
उदाहरणानि -
उपसर्ग + धातु + ल्यप् (य)
परि + ईक्ष् + ल्यप् (य) = परीक्ष्य (दीर्घसन्धिः)
(पूरा/अच्छी तरह से जाँच/Check करके।
* वि + चिन्त् + ल्यप् (य) = विचिन्त्य ( सोच कर)
प्र + नम् + ल्यप् (य) = प्रणम्य ( नमस्कार कर)
Note - ऋ , ष् , र् के बाद " न " का " ण " हो जाता है।
उदाहरणम् - रामेण (तृ.वि.ए.व.) , रामाणाम् ( ष. वि. ब. व.)
परि + भ्रम् + ल्यप् (य) = परिभ्रम्य (घूम कर) (Note - भ्रमित्वा)
आ + नी + ल्यप् (य) = आनीय ( ला कर )
निर् + गम् + ल्यप् (य) = निर्गम्य ( निकल कर)
उप + हस् + ल्यप् (य) = उपहस्य (उपहास/ मज़ाक कर )
सम् + पठ् + ल्यप् (य) = संपठ्य (पढ़कर/ अच्छी प्रकार से पढ़कर )
सम् + दृश् + ल्यप् (य) = संदृश्य (देखकर) Note - दृष्ट्वा / अवलोक्य
2. सूत्रम् - ह्रस्वस्य पिति कृति तुक्
धातु/Root के Last में छोटा स्वर
अ , इ , उ , ऋ + त् + ल्यप् (य)
उदाहरणानि -
वि + जि + त् + ल्यप् (य) = विजित्य (जीत कर)
अधि + कृ + त् + ल्यप् (य) = अधिकृत्य (अधिकार कर )
आ + श्रि + त् + ल्यप् (य) = आश्रित्य (आश्रय/सहारा लेकर)
* " म् " को हटाना (विकल्प से लोप)
उदाहरणानि -
आ + गम् + त् + ल्यप् (य) = आगत्य/आगम्य (आकर)
उप + गम् + त् + ल्यप् (य) = उपगत्य/ उपगम्य (पास जाकर)
निर् + गम् + ल्यप् (य) = * निर्गम्य ( निकल कर )
3. धातु के Last में आ , ई , ऊ हो तो No Change/ वह उसी रूप में रहेगा।
उदाहरणानि -
उपसर्ग + धातु + ल्यप् (य)
प्र + दा (देना) + ल्यप् (य) = प्रदाय (दे कर)
उत् + *स्था (रुकना/ठहरना) + ल्यप् (य) = उत्थाय ( उठ कर )
नि + धा + ल्यप् (य) = निधाय ( रख कर)
वि + क्री (खरीदना)+ ल्यप् (य) = विक्रीय (बेच कर)
आ + नी + ल्यप् (य) = आनीय ( ला कर)
नि + ली + ल्यप् (य) = निलीय (छुप कर)
अनु + भू + ल्यप् (य) = अनुभूय ( अनुभव कर )
कृ - करना
क्री - खरीदना
1. शिक्षकः उत्तरपुस्तिकां परि + ईक्ष् + ल्यप् कक्षायां गच्छति। परीक्ष्य
2. पुत्री देवं प्र + नम् + ल्यप् विद्यालयं गच्छति । प्रणम्य
3. बालकः वि + चिन्त् + ल्यप् उत्तरं ददाति । विचिन्त्य
4. रामः उद्याने परिभ्रम्य गृहम् आगच्छति । परि + भ्रम् + ल्यप् प्रत्ययः
5. कृष्णः पुस्तकं संदृश्य पठति । सम् + दृश् + ल्यप् प्रत्ययः
6. नारायणः गृहात् निर्गम्य देवालयं/ मन्दिरं गच्छति। निर् + गम् + ल्यप् प्रत्ययः
ल्यप् - प्रत्ययः
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